Delhi High Court News: ‘लड़कियों के कपड़े नहीं, लड़कों का आचरण बदलो’, दिल्ली HC की सख्त टिप्पणी

Delhi High Court News: दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि लड़कियों के कपड़े उनकी व्यक्तिगत पसंद हैं। जानें 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में कोर्ट ने क्या टिप्पणी की और आरोपी को क्यों दोषी ठहराया।

Delhi High Court News: दिल्ली हाई कोर्ट ने महिलाओं और लड़कियों के पहनावे को लेकर एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी लड़की या महिला के कपड़े उसकी व्यक्तिगत पसंद हैं। उसके पहनावे को आधार बनाकर उसके चरित्र पर सवाल उठाना या यौन उत्पीड़न की घटना के लिए उसके कपड़ों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। कोर्ट ने कहा कि समाधान लड़कियों और महिलाओं के कपड़ों को नियंत्रित करने में नहीं, बल्कि बच्चों को अपने आचरण पर नियंत्रण रखना और दूसरों की व्यक्तिगत सीमाओं का सम्मान करना सिखाने में है। Delhi High Court News

क्या है पूरा मामला?

यह मामला वर्ष 2013 के एक यौन उत्पीड़न केस से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि आरोपी, जो उसका पड़ोसी था, उसका पीछा करता था, यौन प्रकृति की टिप्पणियां करता था और उसकी आपत्ति के बावजूद उसे अनुचित तरीके से छूता था।

मामले में ट्रायल कोर्ट ने वर्ष 2014 में आरोपी को बरी कर दिया था। इसके बाद राज्य सरकार ने इस फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी। हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति चंद्रशेखरन सुधा की पीठ ने की। Delhi High Court News

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लड़की के कपड़ों को लेकर कोर्ट में क्या हुआ?

मामले की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता से उसके पहनावे और आसपास के लोगों की उसके कपड़ों को लेकर आपत्तियों से जुड़े सवाल किए गए थे। रिपोर्टों के अनुसार, उसकी पश्चिमी पोशाक और जींस पहनने जैसे मुद्दों को भी जिरह और दलीलों में उठाया गया।

हाई कोर्ट ने इस तरह की जिरह पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि किसी महिला के कपड़ों, चरित्र, जीवनशैली या व्यक्तिगत पसंद को तब तक मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए जब तक वह मामले के किसी वास्तविक और प्रासंगिक तथ्य से सीधे जुड़ा न हो। Delhi High Court News

‘जींस पहनने से लड़के बिगड़ते हैं’ वाली सोच पर कोर्ट नाराज

हाई कोर्ट ने उस सोच को बेहद चिंताजनक और अस्वीकार्य बताया जिसमें यह माना जाता है कि लड़की के जींस पहनने से लड़के ‘बिगड़’ सकते हैं।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लड़की या महिला क्या पहनती है, यह उसकी व्यक्तिगत पसंद का विषय है। पड़ोसी, समाज, आरोपी या अदालत में पेश होने वाला वकील किसी महिला के पहनावे को तय करने का अधिकार नहीं रखता।

लड़कियों के कपड़ों को नियंत्रित करना समाधान नहीं

कोर्ट की टिप्पणी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यही था कि महिलाओं और लड़कियों के कपड़ों को नियंत्रित करना समस्या का समाधान नहीं है।

अदालत ने कहा कि माता-पिता और समाज को बच्चों को यह सिखाना चाहिए कि वे अपने व्यवहार पर नियंत्रण रखें, दूसरे व्यक्ति की व्यक्तिगत सीमाओं का सम्मान करें और घर हो या बाहर, हर इंसान के साथ गरिमा से पेश आएं।

यानी किसी व्यक्ति के कपड़े किसी दूसरे व्यक्ति को गलत व्यवहार करने का अधिकार नहीं देते। Delhi High Court News

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कोर्ट ने पीड़िता से हुई जिरह को भी अनुचित बताया

हाई कोर्ट ने मामले में शिकायतकर्ता से की गई जिरह को भी गंभीरता से देखा। अदालत के अनुसार, उसके पहनावे और दूसरे निजी पहलुओं से जुड़े सवाल मामले के मूल मुद्दे से संबंधित नहीं थे।

कोर्ट ने माना कि इस तरह की जिरह अनुचित थी और इसे ट्रायल के स्तर पर ही रोका जाना चाहिए था।

हाई कोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराया

दिल्ली हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के बरी करने के फैसले को पलटते हुए आरोपी को यौन उत्पीड़न के अपराध में दोषी ठहराया। हालांकि, कोर्ट ने POCSO के आरोप को लागू करने के लिए शिकायतकर्ता की नाबालिग उम्र पर्याप्त रूप से साबित नहीं होने की बात भी कही। Delhi High Court News

इस तरह हाई कोर्ट ने एक तरफ आरोपी को यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी माना, वहीं दूसरी तरफ यह भी स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता के कपड़े या व्यक्तिगत पसंद उसके खिलाफ इस्तेमाल करने का आधार नहीं बन सकते।

कोर्ट की टिप्पणी क्यों महत्वपूर्ण है?

दिल्ली हाई कोर्ट की यह टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यौन उत्पीड़न या महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में पीड़िता के पहनावे और चरित्र को लेकर सवाल उठाने की प्रवृत्ति पर अदालत ने स्पष्ट रुख अपनाया है।

अदालत ने मूल रूप से यह संदेश दिया कि किसी अपराध की जिम्मेदारी पीड़ित व्यक्ति के कपड़ों या व्यक्तिगत पसंद पर डालने के बजाय अपराध करने वाले व्यक्ति के आचरण और जिम्मेदारी पर ध्यान दिया जाना चाहिए। Delhi High Court News

Delhi High Court News: मुख्य बातें

  • मामला वर्ष 2013 के यौन उत्पीड़न से जुड़ा था।
  • ट्रायल कोर्ट ने वर्ष 2014 में आरोपी को बरी किया था।
  • राज्य ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी।
  • दिल्ली हाई कोर्ट ने आरोपी को यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी ठहराया।
  • कोर्ट ने लड़की के कपड़ों को उसके खिलाफ इस्तेमाल करने पर आपत्ति जताई।
  • अदालत ने कहा कि पहनावा व्यक्ति की व्यक्तिगत पसंद है।
  • बच्चों को अपने आचरण पर नियंत्रण और दूसरों की व्यक्तिगत सीमाओं का सम्मान करना सिखाने पर जोर दिया गया।
  • शिकायतकर्ता से कपड़ों और निजी पसंद को लेकर की गई जिरह को कोर्ट ने अनुचित माना।

निष्कर्ष

दिल्ली हाई कोर्ट की इस टिप्पणी ने महिलाओं के पहनावे को अपराध या अनुचित व्यवहार से जोड़ने वाली सोच पर सवाल खड़ा किया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी लड़की या महिला के कपड़े उसके खिलाफ अपराध करने का कारण या बहाना नहीं बन सकते। Delhi High Court News

कोर्ट का जोर इस बात पर रहा कि समाज में बच्चों को सम्मान, व्यक्तिगत सीमाओं और जिम्मेदार आचरण की शिक्षा दी जानी चाहिए। यही सोच महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान से जुड़े मामलों में ज्यादा महत्वपूर्ण है। (India Today)


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