अगर आप आज यानी 20 सितंबर 2026 को LPG सिलेंडर बुक करने जा रहे हैं तो घरेलू गैस की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। सरकारी तेल कंपनियों ने 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर के दाम पहले की तरह ही रखे हैं।
वहीं, 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में सितंबर की शुरुआत में बदलाव किया गया था। 1 सितंबर को कमर्शियल सिलेंडर के दाम में 9.50 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी हुई थी। इसके बाद से इसकी कीमत भी स्थिर है।
घरेलू LPG की कीमतों में इस साल दो बार बढ़ोतरी हो चुकी है। 7 मार्च को सिलेंडर 60 रुपये और 7 जून को 29 रुपये महंगा किया गया था। जून के बाद घरेलू LPG के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
दिल्ली समेत प्रमुख शहरों में LPG के रेट
20 सितंबर 2026 के अनुसार 14.2 किलोग्राम घरेलू और 19 किलोग्राम कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतें इस प्रकार हैं:
| शहर | घरेलू LPG (14.2 किलो) | कमर्शियल LPG (19 किलो) |
|---|---|---|
| दिल्ली | ₹942 | ₹2,747.50 |
| मुंबई | ₹941.50 | ₹2,701 |
| कोलकाता | ₹968 | ₹2,884 |
| बेंगलुरु | ₹944.50 | ₹2,831 |
| हैदराबाद | ₹994 | ₹2,996 |
| चेन्नई | ₹957.50 | ₹2,916.50 |
| जयपुर | ₹945.50 | ₹2,776 |
| बीकानेर | ₹953.50 | ₹2,798.50 |
| रांची | ₹1,010.50 | ₹2,925.50 |
इस साल कब बढ़े घरेलू LPG के दाम?
2026 में घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में दो प्रमुख बढ़ोतरी हुई। पहली बढ़ोतरी 7 मार्च को हुई, जब घरेलू सिलेंडर 60 रुपये महंगा किया गया। इसके बाद 7 जून को कीमत में 29 रुपये की बढ़ोतरी हुई।
7 जून के बाद से 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
कमर्शियल सिलेंडर के दाम में सितंबर में हुआ बदलाव
19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में 1 सितंबर 2026 को 9.50 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद सितंबर में अभी तक कोई नया बदलाव नहीं हुआ है।
कमर्शियल सिलेंडर का इस्तेमाल मुख्य रूप से होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में किया जाता है, इसलिए इसकी कीमतों में बदलाव का असर कारोबार की लागत पर पड़ सकता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का LPG कीमतों पर असर
LPG और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों का असर पड़ता है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े घटनाक्रमों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतों और आपूर्ति की स्थिति में बदलाव का असर आगे चलकर घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ सकता है।