एटा में दिल दहला देने वाली घटना बेटे की मौत का सदमा नहीं सह पाए पिता, दोनों का एक साथ जनाजा
Etah के जलेसर क्षेत्र से एक बेहद भावुक और दर्दनाक घटना सामने आई है, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। मकसूदपुर गांव में बेटे की अचानक मौत के गम में पिता ने भी दम तोड़ दिया। ईद के मौके पर पिता-पुत्र का एक साथ जनाजा निकला, तो पूरा गांव शोक में डूब गया।
कैसे शुरू हुई यह दुखद घटना
मकसूदपुर गांव निवासी 70 वर्षीय रफीक खान लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। किडनी फेल होने के कारण उन्हें आगरा के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके बेटे जकील (40), जो मुंबई में रहकर सिलाई का काम करते थे, पिता की हालत की खबर मिलने पर तुरंत आगरा पहुंच गए।
कुछ दिनों के इलाज के बाद जब रफीक खान की तबीयत में थोड़ा सुधार हुआ, तो ईद के मौके पर 19 मार्च को जकील उन्हें अस्पताल से छुट्टी दिलाकर गांव ले आए। परिवार को उम्मीद थी कि अब सब कुछ धीरे-धीरे ठीक हो जाएगा, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
अचानक बिगड़ी बेटे की तबीयत
गांव पहुंचने के बाद उसी रात जकील के सीने में अचानक तेज दर्द उठा। शुरुआत में गांव में ही दवा दी गई, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। परिजन घबराकर उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद जकील को मृत घोषित कर दिया।
जवान बेटे की इस अचानक मौत ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया। परिजन रात में ही जकील का शव घर लेकर लौटे, जहां मातम का माहौल बन गया।
बेटे की मौत का सदमा नहीं सह सके पिता
पहले से बीमार चल रहे रफीक खान अपने बेटे की मौत का सदमा सह नहीं पाए। बेटे की मौत के कुछ ही घंटों बाद उनकी हालत तेजी से बिगड़ गई और 20 मार्च की दोपहर उन्होंने भी दम तोड़ दिया।
एक ही घर में पिता और बेटे की मौत की खबर फैलते ही गांव में हड़कंप मच गया। हर कोई इस घटना से स्तब्ध रह गया।
ईद पर एक साथ उठा दोनों का जनाजा
मुंबई में रह रहे जकील के परिवार के लोग जब गांव पहुंच रहे थे, तभी रास्ते में उन्हें दादा के निधन की खबर मिली। इस दोहरे दुख ने पूरे परिवार को तोड़ दिया।
ईद के दिन, शनिवार दोपहर को पिता और पुत्र दोनों का जनाजा एक साथ निकाला गया। इस दृश्य को देखकर गांव के लोगों की आंखें नम हो गईं। हर कोई इस घटना को याद कर भावुक हो उठा।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
जकील अपने परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे। उनके परिवार में पत्नी, तीन बेटियां और दो बेटे हैं, जो सभी पढ़ाई कर रहे हैं। पिता और दादा के एक साथ गुजर जाने से बच्चों के सिर से साया उठ गया है।
अब परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती रोजी-रोटी की है। गांव के लोग और रिश्तेदार इस कठिन समय में परिवार को संभालने की कोशिश कर रहे हैं।
गमगीन माहौल में अदा हुई ईद की नमाज
मकसूदपुर गांव में इस घटना के बाद ईद की खुशियां पूरी तरह फीकी पड़ गईं। नमाज भी गमगीन माहौल में अदा की गई। सिर्फ इसी गांव में नहीं, बल्कि आसपास के इलाकों में भी इस घटना की चर्चा रही और हर कोई इस दुखद घटना से प्रभावित नजर आया।