जी राम जी योजना के तहत हरदोई में बनेंगे फूड फॉरेस्ट 19 ब्लॉक और 5 तहसीलों में होगी शुरुआत
हरदोई। पर्यावरण संरक्षण, पोषण सुरक्षा और सतत विकास को ध्यान में रखते हुए विकसित भारत जी राम जी योजना के तहत हरदोई जिले में बड़े स्तर पर फूड फॉरेस्ट विकसित करने की तैयारी शुरू हो चुकी है। यह पहल न केवल हरियाली बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि ग्रामीण आबादी को पौष्टिक और प्राकृतिक खाद्य संसाधन उपलब्ध कराने का एक मजबूत माध्यम भी बनेगी।
क्या है फूड फॉरेस्ट और क्यों है जरूरी?
फूड फॉरेस्ट एक ऐसा हरित क्षेत्र होता है, जहां विभिन्न प्रकार के फलदार, औषधीय और उपयोगी पौधे एक साथ लगाए जाते हैं। यह प्राकृतिक जंगल की तरह कार्य करता है, लेकिन इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना होता है।
आज के समय में जब जलवायु परिवर्तन, घटती हरियाली और कुपोषण जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं, ऐसे में फूड फॉरेस्ट एक प्रभावी समाधान के रूप में सामने आ रहा है। यह न केवल पर्यावरण को संतुलित करता है, बल्कि स्थानीय समुदायों को आत्मनिर्भर बनाने में भी मदद करता है।
19 ब्लॉकों और 5 तहसीलों में होगा विस्तार
योजना के तहत हरदोई जिले के सभी 19 विकास खंडों में दो-दो फूड फॉरेस्ट स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही जिले की पांचों तहसीलों में भी एक-एक फूड फॉरेस्ट विकसित किया जाएगा।
इस प्रकार पूरे जिले में व्यापक स्तर पर हरित क्षेत्रों का नेटवर्क तैयार होगा, जिससे अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ मिल सकेगा। यह योजना ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में विशेष रूप से प्रभावी साबित हो सकती है।
भूमि चयन की प्रक्रिया तेज
मुख्य विकास अधिकारी सान्या छाबड़ा ने जानकारी देते हुए बताया कि इन फूड फॉरेस्ट के लिए उपयुक्त भूमि की पहचान का कार्य तेजी से किया जा रहा है।
संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में उपलब्ध सरकारी भूमि या अन्य उपयुक्त स्थानों का चयन कर जल्द से जल्द प्रस्ताव प्रस्तुत करें। प्रशासन की कोशिश है कि योजना को बिना किसी देरी के जमीन पर उतारा जाए।
किन-किन पौधों का होगा रोपण?
फूड फॉरेस्ट में स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुसार फलदार पौधों का चयन किया जाएगा। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- आम
- अमरूद
- आंवला
- नींबू
इन पौधों का चयन इसलिए किया गया है क्योंकि ये न केवल पोषण से भरपूर होते हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर आसानी से उगाए जा सकते हैं और लंबे समय तक फल देते हैं।
सुरक्षा और रखरखाव की विशेष व्यवस्था
फूड फॉरेस्ट को सफल बनाने के लिए केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उनकी सुरक्षा और देखभाल भी बेहद जरूरी होती है।
इसी को ध्यान में रखते हुए:
- पौधों को पशुओं से बचाने के लिए बाड़बंदी (फेंसिंग) की जाएगी
- नियमित सिंचाई की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी
- समय-समय पर निगरानी और देखभाल की जाएगी
इससे पौधों का बेहतर विकास होगा और वे जल्दी फल देने लगेंगे।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पोषण पर प्रभाव
यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में कई सकारात्मक बदलाव ला सकती है।
पहला, इससे लोगों को ताजे और पौष्टिक फल आसानी से उपलब्ध होंगे, जिससे कुपोषण की समस्या को कम करने में मदद मिलेगी।
दूसरा, स्थानीय लोग इन फलों का उपयोग घरेलू जरूरतों के साथ-साथ बाजार में बेचकर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर सकते हैं।
तीसरा, यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और लोगों को आत्मनिर्भर बनाने में सहायक होगी।
पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका
फूड फॉरेस्ट का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह पर्यावरण को कई स्तरों पर लाभ पहुंचाता है।
- यह हरित आवरण बढ़ाकर वायु गुणवत्ता सुधारता है
- मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखता है
- जल संरक्षण में मदद करता है
- जैव विविधता को बढ़ावा देता है
इसके अलावा, यह जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
लोगों में जागरूकता और भागीदारी
प्रशासन की इस पहल से लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ने की उम्मीद है। यदि स्थानीय समुदाय को इस योजना से जोड़ा जाए, तो यह और अधिक प्रभावी बन सकती है।
गांव के लोग इन फूड फॉरेस्ट की देखभाल में भागीदारी कर सकते हैं, जिससे उनमें जिम्मेदारी की भावना भी विकसित होगी।
निष्कर्ष
हरदोई में शुरू की जा रही यह पहल केवल एक योजना नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक निवेश है जो आने वाले वर्षों में पर्यावरण, पोषण और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में सकारात्मक परिणाम दे सकती है।
विकसित भारत जी राम जी योजना के तहत बनने वाले फूड फॉरेस्ट न केवल हरियाली बढ़ाएंगे, बल्कि लोगों को प्राकृतिक संसाधनों के प्रति जागरूक बनाते हुए एक स्वस्थ और आत्मनिर्भर समाज की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होंगे।