मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना बेसहारा बच्चों के लिए सहारा बनी हर महीने मिल रहे ₹2500
उत्तर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (Mukhyamantri Bal Seva Yojana UP) आज उन बच्चों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आई है, जिन्होंने अपने माता-पिता में से एक या दोनों को खो दिया है। महिला कल्याण विभाग द्वारा संचालित इस योजना का उद्देश्य ऐसे बच्चों के भरण-पोषण और शिक्षा को सुनिश्चित करना है।
सबसे बड़ी बात यह है कि अब इस योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह 100% ऑनलाइन कर दी गई है, जिससे आवेदकों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। घर बैठे मोबाइल या लैपटॉप के जरिए आवेदन किया जा सकता है और स्वीकृति मिलने के बाद सीधे बच्चे के बैंक खाते में हर महीने ₹2500 भेजे जाते हैं।
0 से 23 वर्ष तक दो चरणों में मिलता है लाभ
इस योजना के तहत बच्चों को दो चरणों में सहायता प्रदान की जाती है:
- पहला चरण (0 से 18 वर्ष)
इस दौरान बच्चों को इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है। - दूसरा चरण (18 से 23 वर्ष)
यदि बच्चा ग्रेजुएशन या अन्य उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहा है, तो उसे 23 वर्ष की आयु तक योजना का लाभ मिलता है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखना है, इसलिए स्कूल या कॉलेज का प्रमाण पत्र अनिवार्य होता है।
रामपुर जिले में सैकड़ों बच्चों को मिल रहा लाभ
रामपुर जिले के आंकड़ों के अनुसार:
- कुल 226 बच्चों के आवेदन स्वीकृत किए जा चुके हैं
- बाल सेवा योजना (कोविड) के तहत 123 बच्चों को लाभ मिला, जिनमें से 54 को वर्तमान में ₹4000 प्रतिमाह मिल रहे हैं
- बाल सेवा योजना (सामान्य) के तहत 103 बच्चों को स्वीकृति मिली, जिनमें से 67 बच्चों को ₹2500 प्रति माह मिल रहा है
- 49 बच्चों को केंद्र सरकार की स्पॉन्सरशिप योजना में ट्रांसफर किया गया है, जहां उन्हें ₹4000 प्रति माह दिए जा रहे हैं
कोविड और सामान्य योजना में क्या है अंतर
दोनों योजनाओं में कुछ महत्वपूर्ण अंतर हैं:
- कोविड बाल सेवा योजना
- ₹4000 प्रति माह सहायता
- कक्षा 9 या उससे ऊपर के छात्रों को लैपटॉप
- बालिकाओं की शादी के लिए ₹1,01,000 का अनुदान
- सामान्य बाल सेवा योजना
- ₹2500 प्रति माह सहायता
- लैपटॉप और शादी अनुदान का प्रावधान नहीं
अब तक लाखों बच्चों को मिल चुका लाभ
- कोविड योजना के तहत अब तक 16,061 बच्चों को लाभ
- वर्तमान में 14,214 बच्चों को ₹4000 प्रति माह मिल रहा है
- 1003 बच्चों को लैपटॉप वितरित किए जा चुके हैं
वहीं सामान्य योजना के तहत:
- कुल 1,03,430 बच्चों को लाभ
- वर्तमान में 87,082 बच्चों को ₹2500 प्रति माह दिया जा रहा है
आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज
योजना का लाभ लेने के लिए निम्न दस्तावेज जरूरी हैं:
- माता-पिता का मृत्यु प्रमाण पत्र
- बच्चे और अभिभावक का आधार कार्ड
- स्कूल या कॉलेज का प्रमाण पत्र
- (यदि एक अभिभावक जीवित है) आय प्रमाण पत्र
ध्यान देने वाली बात यह है कि योजना की राशि सिर्फ बच्चे के व्यक्तिगत बैंक खाते में ही भेजी जाती है, न कि अभिभावक या जॉइंट खाते में।
हर 6 महीने में होती है जांच
जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा हर 6 महीने में बच्चों का फॉलोअप किया जाता है। इसमें यह देखा जाता है कि:
- बच्चा नियमित रूप से स्कूल जा रहा है या नहीं
- दी गई राशि का सही उपयोग हो रहा है या नहीं
अगर किसी बच्चे का आवेदन निरस्त हो जाता है, तो वह जिला प्रोबेशन कार्यालय में अपील कर सकता है।
सफलता की कहानी: अनाथ बच्चों को मिला नया जीवन
योजना की सफलता का एक उदाहरण सामने आया, जहां माता-पिता के निधन के बाद तीन बच्चे अनाथ हो गए थे। उनकी बुआ ने उनकी जिम्मेदारी संभाली, लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर थी। विभाग ने खुद पहल करते हुए बच्चों को इस योजना से जोड़ा। आज ये बच्चे अपनी पढ़ाई पूरी कर चुके हैं और उनका भविष्य सुरक्षित हो गया है।