नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को जंतर-मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन से जुड़े मामलों पर बड़ा आदेश दिया। कोर्ट ने देशभर में इस आंदोलन से संबंधित दर्ज सभी FIR रद्द करने का निर्देश दिया है। यह आदेश सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज मामलों पर लागू होगा।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिन प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पहले से कोई आपराधिक रिकॉर्ड है, उन मामलों पर यह आदेश लागू नहीं होगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस आदेश के बाद आंदोलन से जुड़े मामलों में नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च वापस लेने का फैसला किया है।
13 FIR समेत देशभर के मामलों पर लागू होगा आदेश
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़पों के बाद अलग-अलग जगहों पर मामले दर्ज किए गए थे। दिल्ली में ऐसे 13 FIR का जिक्र कोर्ट में दाखिल आवेदन में किया गया था।
दिल्ली पुलिस की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अंतरिम आवेदन दाखिल कर इन मामलों को आगे नहीं बढ़ाने की अनुमति मांगी गई थी। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कहा गया कि वह प्रदर्शन से जुड़े मामलों में आगे कार्रवाई नहीं करना चाहती।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने आंदोलन से जुड़े मामलों को समाप्त करने का आदेश दिया।
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अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट ने लिया फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने अपने विशेष संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल करते हुए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत यह आदेश दिया।
कोर्ट ने साथ ही स्पष्ट किया कि यह फैसला मामले के विशेष तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखकर दिया गया है। इसलिए इसे भविष्य के दूसरे मामलों के लिए सामान्य उदाहरण या बाध्यकारी मिसाल नहीं माना जाएगा।
कोर्ट ने यह भी कहा कि इस विशेष शक्ति का इस्तेमाल दोनों पक्षों के बीच अदालत के सामने हुए समझौते की शर्तों का पालन किए जाने के आधार पर किया जा रहा है।
CJP ने 5 सितंबर का मार्च किया रद्द
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से प्रवक्ता सौरव दास भी मौजूद थे। उन्होंने संगठन की ओर से बयान देते हुए कहा कि कोर्ट के आदेश और सरकार के भरोसे को देखते हुए 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च वापस लिया जा रहा है।
उनके बयान के बाद CJI सूर्यकांत ने संगठन के इस कदम की सराहना की। उन्होंने कहा कि संस्था के तौर पर वे ऐसे सकारात्मक माहौल के लिए आभारी हैं, जो युवाओं के लिए मददगार साबित हो सकता है।
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CJP ने फैसले को बताया छात्रों की जीत
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने इसे छात्रों की बड़ी जीत बताया।
पार्टी प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि अगस्त की शुरुआत में सरकार के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत रुक गई थी। इसके बाद संगठन को लगा कि सरकार अपने वादे से पीछे हट सकती है। इसी वजह से 5 सितंबर को मार्च निकालने का निर्णय लिया गया था।
उन्होंने कहा कि अब सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश में आंदोलन से जुड़ी FIR खत्म करने का आदेश दिया है और इसे संगठन ने ऐतिहासिक फैसला बताया।
CJP ने अपने बयान में कहा कि छात्रों के खिलाफ चल रहे अनुचित मुकदमों को खत्म करने का यह फैसला आंदोलन से जुड़े लोगों के लिए बड़ी राहत है।
20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों में हुई थी झड़प
जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच तनाव की स्थिति बनी थी। संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सुरक्षा बलों ने कार्रवाई की थी।
इस दौरान लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल की बात सामने आई थी। इसके बाद आंदोलन का असर कई शहरों तक देखने को मिला।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी शामिल था।
20 जून से शुरू हुआ था जंतर-मंतर आंदोलन
कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन 20 जून को जंतर-मंतर से शुरू हुआ था। कई दिनों तक चले प्रदर्शन के दौरान संगठन ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज उठाई।
सरकार की ओर से कुछ मांगों पर सहमति बनने और तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद 25 जुलाई को आंदोलन समाप्त कर दिया गया था।
इसके बाद आंदोलन से जुड़े मामलों को लेकर कानूनी प्रक्रिया जारी रही। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रदर्शनकारियों से जुड़े इन FIR मामलों को समाप्त कर दिया गया है।
CJP को राजनीतिक पार्टी बनाने पर अभिजीत दीपके ने क्या कहा?
जंतर-मंतर आंदोलन के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके संगठन के भविष्य को लेकर आगे की रणनीति तैयार कर रहे हैं।
एक बातचीत में दीपके ने CJP के भविष्य, कोर कमेटी और आने वाले आंदोलनों को लेकर अपनी योजना बताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल संगठन को राजनीतिक पार्टी में बदलने की योजना नहीं है।
उनका कहना है कि संगठन को राजनीतिक पार्टी बनाने के बजाय मौजूदा स्वरूप में ही आगे बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद क्या बदलेगा?
इस आदेश के बाद जंतर-मंतर आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों को बड़ी कानूनी राहत मिली है। आंदोलन से संबंधित जिन FIR को इस आदेश के दायरे में रखा गया है, उनमें आगे की कार्रवाई नहीं होगी।
हालांकि, कोर्ट ने आपराधिक रिकॉर्ड वाले व्यक्तियों से जुड़े मामलों को अलग रखा है। इसलिए सभी मामलों को बिना किसी अपवाद के खत्म हुआ मानना सही नहीं होगा।
निष्कर्ष: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े FIR मामलों पर बड़ा फैसला हुआ है। CJP ने भी 5 सितंबर के प्रस्तावित मार्च को वापस लेने का निर्णय लिया है। कोर्ट ने साफ किया है कि उसका यह आदेश इस मामले की विशेष परिस्थितियों के आधार पर है और इसे दूसरे मामलों में सामान्य मिसाल नहीं माना जाएगा।