सुलतानपुर के कूड़ेभार क्षेत्र स्थित रामनाथपुर गांव में एक प्राचीन टीले से 41 दुर्लभ ऐतिहासिक सिक्के सामने आए हैं। इन सिक्कों को डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय की टीम ने पुरावशेषों के सर्वेक्षण और संग्रहण के दौरान प्राप्त किया है।
संग्रह में प्राचीन काल से लेकर मध्यकाल और 19वीं-20वीं शताब्दी तक के सिक्के शामिल हैं। इनमें चांदी और तांबे के मध्यकालीन सिक्कों के साथ पीतल और जस्ते से बने बाद के दौर के सिक्के भी मिले हैं।
विश्वविद्यालय के अनुसार इन ऐतिहासिक सिक्कों को संरक्षित करने के लिए परिसर में ‘मुद्रा वीथिका’ स्थापित की जाएगी, जहां इन्हें सुरक्षित रखा और प्रदर्शित किया जा सकेगा।
प्राचीन और मध्यकालीन सिक्कों की मिली श्रृंखला
रामनाथपुर के प्राचीन टीले के आकस्मिक उत्खनन से छह सिक्के प्राप्त हुए। इनमें एक सिक्का प्राचीन काल का बताया गया है, जबकि अन्य सिक्के मध्यकाल से संबंधित हैं।
मध्यकालीन सिक्कों में चांदी और तांबे के सिक्के शामिल हैं। इन पर अरबी लिपि और फारसी भाषा में अंकन मिला है, जिससे इनके ऐतिहासिक महत्व का पता चलता है।
19वीं और 20वीं सदी के 35 सिक्के भी संग्रह में शामिल
गांव निवासी दीनानाथ गुप्ता के सहयोग से 19वीं और 20वीं शताब्दी के 35 सिक्के भी विश्वविद्यालय के संग्रह में शामिल किए गए हैं। इनमें पीतल और जस्ते से बने अलग-अलग मूल्यवर्ग के सिक्के हैं।
इनमें एक आना, आधा आना, एक पैसा, दो पैसा, तीन पैसा, पांच पैसा, 10 पैसा, 20 पैसा और 25 पैसे के सिक्के शामिल हैं। संग्रह में एक ‘सीताराम’ धार्मिक टोकन और दो नेपाली सिक्के भी मिले हैं।
‘मुद्रा वीथिका’ में संरक्षित किए जाएंगे सिक्के
इस अभियान को कोशल संग्रहालय के समन्वयक डॉ. राजेश सिंह के नेतृत्व में आगे बढ़ाया गया। सर्वेक्षण के दौरान गैलरी असिस्टेंट डॉ. देशराज उपाध्याय ने सिक्कों को प्राप्त करने में भूमिका निभाई।
कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने टीम को इस उपलब्धि पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक सिक्कों को संरक्षित रखने के लिए विश्वविद्यालय में ‘मुद्रा वीथिका’ स्थापित की जाएगी। इससे इन पुरावशेषों को सुरक्षित रखने के साथ विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए अध्ययन का अवसर भी उपलब्ध होगा।
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