निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में फांसी लगाने से मौत हो गई। कोली को निठारी मामले में कई मामलों में मौत की सजा सुनाई गई थी, लेकिन बाद में अदालतों के फैसलों के बाद वह फांसी की सजा से बरी हो गया था। इसके बाद वह जेल से रिहा हुआ था।
अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पर्याप्त ठोस साक्ष्य के अभाव में सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर को कई मामलों में बरी कर दिया था। नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने भी हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा था। इसके बाद कोली जेल से बाहर आया था।
हरिद्वार में कोली ने कथित तौर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। उसकी मौत के बाद यह मामला फिर चर्चा में आ गया है। शुरुआती तौर पर उसकी दुकान से जुड़ी चिंता को आत्महत्या का संभावित कारण माना जा रहा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
निठारी कांड के बाद देशभर में हुआ था विरोध
दिसंबर 2006 में नोएडा के निठारी गांव में मोनिंदर सिंह पंढेर की कोठी के पास नाले से कई बच्चों के कंकाल और अवशेष बरामद किए गए थे। इसके बाद पंढेर और उसके नौकर सुरेंद्र कोली पर बच्चों के अपहरण और हत्या समेत गंभीर आरोप लगे थे।
इस मामले ने पूरे देश में व्यापक आक्रोश पैदा किया था। आरोपितों को सजा दिलाने की मांग को लेकर कई जगह विरोध प्रदर्शन भी हुए थे। सीबीआई की विशेष अदालतों ने 2009 से 2017 के बीच अलग-अलग मामलों में कोली और पंढेर को मौत की सजा सुनाई थी।
फांसी की सजा से बरी होने के बाद जेल से आया था बाहर
निठारी मामले में सुरेंद्र कोली लंबे समय तक जेल में रहा। हालांकि, बाद की न्यायिक प्रक्रिया में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उसे कई मामलों में बरी कर दिया। कोर्ट के फैसले के खिलाफ आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने भी हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।
इसके बाद कोली जेल से रिहा हो गया था। इस तरह जिस व्यक्ति को कभी मौत की सजा सुनाई गई थी, वह कानूनी फैसलों के बाद जेल से बाहर आ चुका था।
दुकान हटने की चिंता को बताया जा रहा संभावित कारण
रिपोर्ट के अनुसार, कोली ने घटना से करीब 10 दिन पहले दो महीने का 14 हजार रुपये किराया देकर हरिद्वार में दुकान शुरू की थी। इसी दौरान कुंभ की तैयारियों को लेकर आसपास अतिक्रमण हटाने का अभियान चल रहा था।
ऐसा माना जा रहा है कि दुकान हटने की आशंका को लेकर वह तनाव में था। हालांकि, संबंधित दुकान पहले आंचल दुग्ध के आउटलेट के रूप में संचालित हो चुकी थी और उसके हटाए जाने की संभावना नहीं बताई जा रही थी। फिलहाल आत्महत्या के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
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