चित्रकूट में मंदाकिनी नदी की भीषण बाढ़ के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नदी के कैचमेंट क्षेत्र में हुए निर्माण और अतिक्रमण को लेकर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि नदी के प्राकृतिक बहाव और जल निकासी के रास्ते में रुकावट आने से बाढ़ की स्थिति गंभीर हो सकती है। सरकार नदी किनारे किए गए अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई करेगी।
रविवार को रामायण मेला परिसर में बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत सामग्री वितरित करने पहुंचे मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार की बाढ़ बेहद गंभीर रही। उन्होंने बताया कि उन्होंने हवाई सर्वेक्षण के साथ रामघाट पहुंचकर भी प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति देखी है।
कैचमेंट क्षेत्र में निर्माण पर होगी समीक्षा
मुख्यमंत्री ने कहा कि नदी के कैचमेंट क्षेत्र में निर्माण होने से पानी के निकलने की प्राकृतिक व्यवस्था प्रभावित होती है। इससे जलस्तर बढ़ने पर बाढ़ का प्रभाव अधिक गंभीर हो सकता है। उन्होंने नदी के प्राकृतिक प्रभाव क्षेत्र को सुरक्षित रखने की जरूरत पर जोर दिया।
योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों के साथ बाढ़ और इसके कारणों की समीक्षा करने की बात कही। इस दौरान नदी किनारे अतिक्रमण और कैचमेंट क्षेत्र में निर्माण से जुड़े मामलों की भी समीक्षा की जाएगी।
राहत-बचाव के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लगाईं
मुख्यमंत्री के अनुसार, बाढ़ के दौरान राहत और बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पीएसी फ्लड की कुल आठ टीमें लगाई गई थीं। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए गए थे।
उन्होंने बाढ़ की गंभीरता का जिक्र करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में एक पक्का पुल तक बह गया। उनके मुताबिक चित्रकूट में इस स्तर की बाढ़ उन्होंने पहली बार देखी।
क्षतिग्रस्त मकानों और फसल के नुकसान का मिलेगा मुआवजा
मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित परिवारों को सरकार की ओर से मदद का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास उपलब्ध कराया जाएगा।
किसानों, व्यापारियों और अन्य प्रभावित परिवारों को हुए नुकसान का सर्वे कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावित लोगों को नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा और राहत एवं पुनर्वास के लिए बजट की कमी नहीं होने दी जाएगी।
राहत व्यवस्था पर पूर्व सरकारों को घेरा
मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों की बाढ़ राहत व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि 2017 से पहले बाढ़ प्रभावित लोगों को पर्याप्त राहत नहीं मिलती थी और राहत के नाम पर केवल सूखी ब्रेड बांटने तक व्यवस्था सीमित रहती थी।
उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार ने आपदा के समय राहत और बचाव को प्राथमिकता दी है और प्रभावित लोगों को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।
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