मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने प्रोबेशन अवधि के दौरान कर्मचारियों को कम वेतन देने की व्यवस्था को असंवैधानिक करार देते हुए निरस्त कर दिया है। अदालत ने कहा कि जब कर्मचारी से निर्धारित पद का पूरा काम लिया जा रहा है तो भर्ती नियमों में तय वेतनमान से कम भुगतान नहीं किया जा सकता।
इस फैसले का सीधा असर 25 नवंबर 2019 के बाद नियुक्त संबंधित कर्मचारियों पर पड़ेगा। हाई कोर्ट ने ऐसे कर्मचारियों को प्रोबेशन अवधि में किए गए काम के लिए भर्ती नियमों के अनुसार पूरा वेतन देने के निर्देश दिए हैं।
चार साल की प्रोबेशन व्यवस्था पर भी रोक
राज्य सरकार ने दिसंबर 2019 में कर्मचारी चयन बोर्ड (ESB) के माध्यम से होने वाली भर्तियों के लिए चार वर्ष की प्रोबेशन व्यवस्था लागू की थी। इसमें वेतन का भुगतान चरणबद्ध तरीके से किया जाता था।
व्यवस्था के अनुसार पहले साल 70 प्रतिशत, दूसरे साल 80 प्रतिशत, तीसरे साल 90 प्रतिशत और चौथे साल से 100 प्रतिशत वेतन देने का प्रावधान था। यह व्यवस्था 25 नवंबर 2019 के मेमो के आधार पर लागू की गई थी।
हाई कोर्ट ने इस वेतन कटौती की व्यवस्था को कानून की कसौटी पर उचित नहीं माना और इसे निरस्त कर दिया।
समान काम के लिए कम वेतन पर कोर्ट की टिप्पणी
अदालत ने कहा कि लोक सेवा आयोग (PSC) के माध्यम से नियुक्त अधिकारियों को शुरुआत से पूरा वेतन दिया जा रहा था, जबकि ESB के जरिए नियुक्त कर्मचारियों को कम वेतन मिल रहा था। कोर्ट ने इस अंतर को समानता के अधिकार के विपरीत माना।
फैसले में संविधान के अनुच्छेद 12 और 14 के संदर्भ में भी व्यवस्था की वैधानिकता पर विचार किया गया। कोर्ट के मुताबिक भर्ती नियमों में जिस पद के लिए वेतनमान निर्धारित है, कर्मचारी को उस निर्धारित वेतन से वंचित नहीं किया जा सकता।
कदाचार पर सजा संभव, लेकिन निर्धारित वेतन से कम नहीं
हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कर्मचारी के खिलाफ कदाचार या गलत आचरण साबित होने पर संबंधित सेवा नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इसमें इंक्रीमेंट रोकने या नियमों के अनुसार निचले पे-स्केल में भेजने जैसी कार्रवाई संभव हो सकती है।
हालांकि, न्यूनतम निर्धारित वेतनमान से नीचे भुगतान करने का प्रावधान नहीं बनाया जा सकता। यानी अनुशासनात्मक कार्रवाई और प्रोबेशन के नाम पर निर्धारित वेतन से कम भुगतान, दोनों को एक ही आधार पर नहीं देखा जा सकता।
25 नवंबर 2019 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को राहत
इस आदेश से 25 नवंबर 2019 के बाद नियुक्त संबंधित कर्मचारियों को प्रोबेशन अवधि के वेतन को लेकर राहत मिलने का रास्ता खुला है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उस अवधि में किए गए काम के लिए भर्ती नियमों के अनुसार पूरा वेतन दिया जाना चाहिए।
फैसले के बाद संबंधित विभागों को कर्मचारियों के वेतन भुगतान की व्यवस्था अदालत के निर्देशों के अनुरूप करनी होगी।
भोपाल में सोशल मीडिया पर सख्ती, भड़काऊ पोस्ट और शेयर पर कार्रवाई