राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में 3 बड़े नाम सवालों के घेरे में

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव की भूमिका पर सवाल।

अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में अब मंदिर ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। आरोप हैं कि मंदिर परिसर में चढ़ावे की राशि में गड़बड़ी की जानकारी होने के बावजूद समय रहते कार्रवाई नहीं की गई और न ही पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।

इस पूरे मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और परिसर व्यवस्थापक गोपाल राव सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। कई संतों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते निगरानी और जांच की जाती तो कथित चोरी को रोका जा सकता था।

चंपत राय पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?

राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय मंदिर प्रशासन के सबसे प्रभावशाली चेहरों में माने जाते हैं। आरोप है कि चढ़ावे की गिनती से जुड़े एक कर्मचारी की संदिग्ध गतिविधि CCTV कैमरे में रिकॉर्ड होने के बाद भी मामले को सार्वजनिक नहीं किया गया।

बताया जा रहा है कि 7 जून को एक कर्मचारी ने दान राशि में से नोटों की गड्डी छिपाने की कोशिश की थी। पूछताछ के दौरान उसने कथित तौर पर चढ़ावे की रकम में हो रही अनियमितताओं की जानकारी दी। इसके बावजूद पुलिस को सूचना नहीं दी गई और न ही तत्काल एफआईआर दर्ज कराई गई।

आलोचकों का कहना है कि यदि शुरुआती स्तर पर ही कड़ी कार्रवाई होती तो मामला इतना बड़ा नहीं बनता। वहीं ट्रस्ट की ओर से पहले यह दावा किया गया था कि चढ़ावे की राशि का नियमित ऑडिट होता है और किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने नहीं आई है।

पूर्व लेखाकार के दावों से बढ़ा विवाद

मामले ने नया मोड़ तब लिया जब श्रीराम मंदिर के पूर्व लेखाकार महिपाल सिंह ने दावा किया कि चढ़ावे की राशि में गड़बड़ी कोई नई बात नहीं है। उनके अनुसार वर्ष 2021 में भी उन्होंने कथित अनियमितताओं की जानकारी ट्रस्ट अधिकारियों को दी थी।

महिपाल सिंह का आरोप है कि शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई और उन्हें ही जिम्मेदारियों से हटा दिया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले सोने-चांदी और अन्य कीमती आभूषणों का पूरा रिकॉर्ड नहीं रखा जाता था।

हालांकि इन आरोपों पर ट्रस्ट की ओर से कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

गोपाल राव की भूमिका पर भी उठे सवाल

मंदिर परिसर के व्यवस्थापक होने के नाते गोपाल राव की जिम्मेदारी सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को संभालने की मानी जाती है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि चढ़ावे की गिनती प्रक्रिया में संभावित गड़बड़ियों की जानकारी मिलने के बाद भी CCTV फुटेज की व्यापक जांच नहीं कराई गई।

सवाल यह भी उठ रहे हैं कि दान गिनने वाले कर्मचारियों से तत्काल पूछताछ क्यों नहीं की गई और संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी क्यों नहीं बढ़ाई गई।

स्थानीय स्तर पर कई लोग मानते हैं कि यदि व्यवस्थागत स्तर पर सख्ती बरती जाती तो मामला शुरुआती चरण में ही सामने आ सकता था।

डॉ. अनिल मिश्रा भी चर्चा में

राम मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा भी इस विवाद में चर्चा के केंद्र में हैं। मंदिर के वित्तीय और प्रशासनिक कार्यों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।

आलोचकों का आरोप है कि चढ़ावे और उससे जुड़े वित्तीय प्रबंधन की निगरानी में अधिक पारदर्शिता होनी चाहिए थी। साथ ही मंदिर प्रशासन में रिश्तेदारों और परिचितों की नियुक्तियों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

हालांकि इन आरोपों पर डॉ. अनिल मिश्रा की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

2025-26 के आय-व्यय रिकॉर्ड पर भी सवाल

21 मार्च को हुई ट्रस्ट की बैठक में 1 अप्रैल 2025 से 28 फरवरी 2026 तक का आय-व्यय रिकॉर्ड पेश किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार इस अवधि में श्रद्धालुओं ने लगभग 82 करोड़ रुपये का दान दिया था, जिसमें करीब 54 करोड़ रुपये दानपेटियों के माध्यम से प्राप्त हुए।

विवाद इस बात को लेकर भी है कि बैठक में प्रस्तुत विवरण में चढ़ावे के रूप में प्राप्त आभूषणों और अन्य कीमती वस्तुओं का अलग से उल्लेख नहीं किया गया था। इसी आधार पर कुछ लोग अधिक पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।

FIR नहीं होने पर उठ रहे सवाल

मामले का सबसे बड़ा विवाद यह है कि कथित अनियमितताओं और करोड़ों रुपये की चोरी के आरोपों के बावजूद लंबे समय तक एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई।

अयोध्या के कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों का कहना है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े मामले में पूरी पारदर्शिता बरती जानी चाहिए और दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

SIT जांच के बाद सामने आ सकती है सच्चाई

फिलहाल पूरे मामले की जांच स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) कर रही है। जांच एजेंसियां चढ़ावे की राशि, दानपेटियों की निगरानी व्यवस्था, कर्मचारियों की भूमिका और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच में जुटी हैं।

आने वाले दिनों में SIT की रिपोर्ट के आधार पर कई बड़े फैसले लिए जा सकते हैं। रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि कथित चोरी और अनियमितताओं के लिए वास्तव में कौन जिम्मेदार है और किस स्तर पर लापरवाही हुई।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी का यह मामला अब केवल वित्तीय अनियमितताओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं और मंदिर प्रशासन की पारदर्शिता से भी जुड़ गया है। इसलिए पूरे देश की नजरें अब जांच रिपोर्ट और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

More

Leave a Comment