नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को लेकर केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण जानकारी दी है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील को अंतिम रूप देने में सबसे अहम मुद्दा ऐसा टैरिफ ढांचा है, जिससे भारतीय निर्यातकों को दूसरे प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में फायदा मिल सके।
सरकार के मुताबिक, जैसे ही अमेरिका भारत को प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर या अनुकूल टैरिफ दर उपलब्ध कराने की स्थिति में होगा, अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने और उसकी विस्तृत जानकारी घोषित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील कब होगी फाइनल?
पीयूष गोयल ने गुरुवार को FTA के इस्तेमाल से जुड़े एक कार्यक्रम में कहा कि भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम BTA का ढांचा पहले ही तय किया जा चुका है। अब समझौते को अंतिम रूप देने के लिए टैरिफ से जुड़ी व्यवस्था महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि जब अमेरिका भारत को उसके प्रतिस्पर्धियों की तुलना में बेहतर टैरिफ दर देने में सक्षम होगा, तब BTA को अंतिम रूप दिया जाएगा।
यानी फिलहाल बातचीत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा इस बात पर केंद्रित है कि भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाजार में दूसरे देशों के मुकाबले किस तरह की टैरिफ सुविधा मिलेगी।
2 फरवरी को तय हुआ था अंतरिम BTA का फ्रेमवर्क
भारत और अमेरिका ने 2 फरवरी को अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए एक फ्रेमवर्क को अंतिम रूप दिया था। हालांकि, इसके बाद समझौते पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
इसकी एक प्रमुख वजह अमेरिका में टैरिफ से जुड़ी कानूनी स्थिति में बदलाव रहा। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप प्रशासन की ओर से लगाए गए कुछ टैरिफ के कानूनी आधार को अमान्य किए जाने के बाद भारत के लिए प्रस्तावित preferential tariff व्यवस्था पर भी असर पड़ा।
अब दोनों देशों के बीच टैरिफ संरचना को लेकर स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकेगा।
भारत चाहता है प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले बेहतर टैरिफ
भारत सरकार का मुख्य जोर इस बात पर है कि भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में दूसरे प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में नुकसान न हो।
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत ने पिछले वर्षों में जिन व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, उनमें भी इस बात का ध्यान रखा गया है कि भारतीय कारोबारियों को संबंधित बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिले।
सरकार इसी दृष्टिकोण को भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में भी लागू करना चाहती है।
भारत ने कई देशों के साथ किए FTA
सरकार के मुताबिक, भारत ने हाल के वर्षों में कई देशों और व्यापारिक समूहों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) किए हैं।
2021 के बाद भारत ने मॉरीशस, UAE, ऑस्ट्रेलिया, EFTA, ओमान और ब्रिटेन के साथ व्यापार समझौते किए और उन्हें लागू किया है।
वहीं, न्यूजीलैंड और यूरोपीय संघ के साथ हुए समझौतों को लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। अमेरिका के साथ अंतरिम BTA का फ्रेमवर्क भी तय हो चुका है, लेकिन टैरिफ व्यवस्था के अंतिम स्वरूप पर सहमति का इंतजार है।
भारत की नजर 75% वैश्विक व्यापार तक पहुंच पर
पीयूष गोयल के मुताबिक, भारत आने वाले समय में कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ नए व्यापार समझौते करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
इन समझौतों का उद्देश्य भारतीय कंपनियों और निर्यातकों को ज्यादा से ज्यादा विदेशी बाजारों में बेहतर पहुंच उपलब्ध कराना है। सरकार का लक्ष्य ऐसे व्यापारिक समझौतों के जरिए भारत को वैश्विक व्यापार के करीब 75% हिस्से तक ऐसे बाजारों में पहुंच दिलाना है, जहां भारतीय उत्पादों पर प्रतिस्पर्धियों की तुलना में अनुकूल दरें लागू हों।
कनाडा, चिली और अन्य देशों से बातचीत जारी
भारत की कई देशों के साथ व्यापार समझौते को लेकर बातचीत चल रही है। इनमें कनाडा, मैक्सिको, चिली, मर्कोसुर, SACU, GCC और इजरायल शामिल हैं।
इसके अलावा भारत ASEAN, दक्षिण कोरिया और जापान के साथ मौजूदा व्यापार समझौतों की समीक्षा और विस्तार पर भी काम कर रहा है।
इन समझौतों के जरिए भारतीय निर्यातकों के लिए नए बाजार खोलने और मौजूदा बाजारों में बेहतर पहुंच हासिल करने की कोशिश की जा रही है।
चिली के साथ CEPA पर बातचीत अंतिम चरण में
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक भारत और चिली के बीच Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) को लेकर बातचीत अंतिम चरण के करीब है।
चिली महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों से समृद्ध देश है। ऐसे में दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी भारत के लिए व्यापार के साथ-साथ रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
अमेरिका के साथ टैरिफ मुद्दा क्यों महत्वपूर्ण है?
अमेरिकी बाजार भारतीय निर्यातकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में यदि भारतीय उत्पादों पर दूसरे प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में अधिक टैरिफ लागू होता है, तो भारतीय कंपनियों को कीमत के स्तर पर नुकसान हो सकता है।
इसी वजह से सरकार चाहती है कि भारत-अमेरिका BTA में टैरिफ संरचना ऐसी हो जिससे भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धी बने रहें।
अमेरिका की ओर से कुछ भारतीय उत्पादों पर टैरिफ कार्रवाई और नए व्यापारिक जांच मामलों की वजह से भी दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता में अनिश्चितता बनी हुई है।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील की मुख्य बातें
- समझौता: अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौता (BTA)
- भारत की ओर से: वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल
- मुख्य मुद्दा: टैरिफ संरचना
- भारत की मांग: प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में अनुकूल टैरिफ दर
- फ्रेमवर्क: 2 फरवरी को तय
- अंतिम समझौता: टैरिफ व्यवस्था स्पष्ट होने के बाद
- अन्य बातचीत: कनाडा, मैक्सिको, चिली, इजरायल, GCC समेत कई देश
- लक्ष्य: भारतीय निर्यातकों के लिए वैश्विक बाजारों में बेहतर पहुंच
निष्कर्ष
भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते का ढांचा तैयार हो चुका है, लेकिन अंतिम समझौते के लिए टैरिफ व्यवस्था पर स्पष्टता जरूरी है। पीयूष गोयल के मुताबिक, जैसे ही भारत को उसके प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में अमेरिकी बाजार में बेहतर टैरिफ लाभ मिलेगा, BTA को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ा जाएगा। इसके साथ ही भारत कई अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ व्यापार समझौतों पर भी तेजी से काम कर रहा है।