जम्मू-कश्मीर: जम्मू-कश्मीर के मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में इंटर्न डॉक्टरों की स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर शुरू हुई हड़ताल गुरुवार को लगातार चौथे दिन भी जारी रही। इंटर्न डॉक्टर मौजूदा ₹12,300 मासिक स्टाइपेंड को बढ़ाकर ₹30,000 करने की मांग पर अड़े हुए हैं।
हड़ताल को कई राजनीतिक दलों का भी समर्थन मिल चुका है। कांग्रेस, पीडीपी और सीपीआई (एम) ने इंटर्न डॉक्टरों की मांग का समर्थन करते हुए सरकार से मामले में जल्द फैसला लेने की अपील की है। हालांकि, अभी तक सरकार की ओर से स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है।
सोमवार से शुरू हुई इंटर्न डॉक्टरों की हड़ताल
इंटर्न डॉक्टरों ने अपनी मांगों को लेकर सोमवार से हड़ताल शुरू की थी। हड़ताल शुरू होने के कुछ ही समय बाद स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू ने उनकी मांग को उचित बताया था।
मंत्री की ओर से इंटर्न डॉक्टरों को आश्वासन दिया गया कि स्टाइपेंड बढ़ाने के प्रस्ताव को लेकर वित्त विभाग के साथ बातचीत की जा रही है।
इसके बावजूद इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि केवल आश्वासन से बात नहीं बनेगी। जब तक स्टाइपेंड बढ़ाने का आधिकारिक आदेश जारी नहीं होता, तब तक वे आंदोलन जारी रखेंगे।
₹12,300 से बढ़ाकर ₹30,000 स्टाइपेंड की मांग
इंटर्न डॉक्टरों की प्रमुख मांग मासिक स्टाइपेंड में बढ़ोतरी है। उनका कहना है कि मौजूदा ₹12,300 स्टाइपेंड वर्तमान परिस्थितियों में पर्याप्त नहीं है।
इंटर्न डॉक्टर चाहते हैं कि उनका मासिक स्टाइपेंड बढ़ाकर ₹30,000 किया जाए। उनका दावा है कि इस मांग को लेकर प्रस्ताव पिछले कई वर्षों से लंबित है।
डॉक्टरों का कहना है कि वे नियमित रूप से अपनी ड्यूटी निभाते हैं और मरीजों की देखभाल में योगदान देते हैं। इसलिए उनके स्टाइपेंड में उचित बढ़ोतरी की जानी चाहिए।
तीन साल से वित्त विभाग के पास लंबित है प्रस्ताव
इंटर्न डॉक्टरों के अनुसार स्टाइपेंड बढ़ाने का प्रस्ताव करीब तीन साल से वित्त विभाग के पास लंबित है। उनका कहना है कि पहले भी स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन किया गया था, जिसके बाद प्रस्ताव आगे भेजा गया था।
लेकिन लंबे समय के बाद भी इस पर अंतिम मंजूरी नहीं मिल पाई है। इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई के बीच मौजूदा स्टाइपेंड में गुजारा करना मुश्किल है।
इमरजेंसी सेवाओं में ड्यूटी कर रहे इंटर्न
हड़ताल के बावजूद इंटर्न डॉक्टरों ने मरीजों की जरूरी सेवाओं को पूरी तरह बंद नहीं किया है। वे इमरजेंसी और कुछ प्रमुख चिकित्सा सेवाओं में अपनी ड्यूटी जारी रखे हुए हैं।
इसी वजह से जीएमसी जम्मू और उससे जुड़े अस्पतालों में मरीजों की देखभाल पर हड़ताल का कोई बड़ा असर अभी तक देखने को नहीं मिला है।
गुरुवार को भी हड़ताली इंटर्न डॉक्टर जीएमसी की ओपीडी के बाहर धरने पर बैठे रहे।
आधिकारिक आदेश जारी होने तक हड़ताल जारी रखने का ऐलान
धरने पर बैठे डॉक्टरों का कहना है कि उनकी मांग को सरकार और राजनीतिक दल उचित बता रहे हैं, लेकिन अब उन्हें सिर्फ आश्वासन नहीं चाहिए।
इंटर्न डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि स्टाइपेंड बढ़ाने का आधिकारिक आदेश जारी होने के बाद ही हड़ताल समाप्त करने पर फैसला लिया जाएगा।
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कांग्रेस, PDP और CPI(M) ने दिया समर्थन
इंटर्न डॉक्टरों के आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिल रहा है। कांग्रेस, पीडीपी और सीपीआई (एम) ने उनकी मांगों का समर्थन किया है।
राजनीतिक दलों ने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से मामले में हस्तक्षेप कर जल्द समाधान निकालने की मांग की है।
उनका कहना है कि इंटर्न डॉक्टर स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उनकी जायज मांग पर सरकार को जल्द फैसला लेना चाहिए।
सरकार के आश्वासन के बावजूद गतिरोध बरकरार
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री की ओर से बातचीत का आश्वासन दिए जाने के बावजूद इंटर्न डॉक्टर अपनी मांग से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं।
फिलहाल सरकार और इंटर्न डॉक्टरों के बीच मुख्य मुद्दा स्टाइपेंड की राशि और आधिकारिक मंजूरी का है। जब तक इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं होता, हड़ताल जारी रहने की संभावना है।
जम्मू-कश्मीर इंटर्न डॉक्टर हड़ताल: मुख्य बातें
- हड़ताल: लगातार चौथे दिन जारी
- मौजूदा स्टाइपेंड: ₹12,300 प्रति माह
- मांग: ₹30,000 प्रति माह
- हड़ताल शुरू: सोमवार
- प्रमुख मांग: स्टाइपेंड में बढ़ोतरी का आधिकारिक आदेश
- इमरजेंसी सेवाएं: इंटर्न डॉक्टर ड्यूटी कर रहे हैं
- राजनीतिक समर्थन: कांग्रेस, PDP और CPI(M)
- लंबित प्रस्ताव: करीब तीन साल से वित्त विभाग के पास
निष्कर्ष
जम्मू-कश्मीर में इंटर्न डॉक्टरों की स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर जारी हड़ताल चौथे दिन भी खत्म नहीं हुई है। डॉक्टर ₹12,300 से बढ़ाकर ₹30,000 मासिक स्टाइपेंड की मांग कर रहे हैं। सरकार की ओर से बातचीत और आश्वासन दिया गया है, लेकिन इंटर्न डॉक्टर आधिकारिक आदेश जारी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं।