निठारी कांड के मामलों में लंबे समय तक जेल में रहने और बाद में अदालत से बरी होने के बाद सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में नई जिंदगी शुरू करने की कोशिश की थी। वह कुछ समय तक वॉचमैन की नौकरी करता रहा और बाद में चाय की दुकान शुरू की। लेकिन 18 सितंबर 2026 को हरिद्वार में उसकी मौत हो गई। पुलिस ने शुरुआती तौर पर इसे आत्महत्या माना है। पोस्टमार्टम और जांच के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।
कोली करीब 19 साल जेल में रहा और इस दौरान उसने अपने मामले से जुड़े सवालों को लेकर आरटीआई के जरिए जानकारी जुटाने की कोशिश की थी। उसके परिचितों के अनुसार, वह जेल से बाहर आने के बाद काम करके सामान्य जीवन शुरू करना चाहता था। ऐसे में उसकी मौत के पीछे की वजह को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
हरिद्वार में रहने के दौरान उसने ‘सदाराम’ नाम से भी पहचान बनाई थी। वह पहले वॉचमैन की नौकरी कर चुका था और छह सितंबर को चाय की दुकान शुरू की थी। उसकी दुकान पर कामकाज शुरू होने के कुछ ही दिन बाद उसकी मौत हो गई।
जेल में आरटीआई के जरिए जुटाई जानकारी
कोली के परिचित नारायण सिंह रावत के अनुसार, जेल में रहते हुए उसने आरटीआई के जरिए यह जानकारी मांगी थी कि उसके जेल जाने के बाद नोएडा से कितने बच्चे लापता हुए। उपलब्ध जानकारी के आधार पर उसने अदालत में यह सवाल उठाया था कि यदि वह बच्चों के अपहरण में शामिल था तो उसके जेल जाने के बाद भी ऐसी घटनाएं क्यों सामने आती रहीं।
बाद की न्यायिक प्रक्रिया में निठारी से जुड़े मामलों में उसके खिलाफ अभियोजन का मामला कमजोर पड़ा और अंततः वह बरी हुआ। 2025 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद वह जेल से बाहर आया था।
जेल से बाहर निकलने के बाद काम की तलाश
रिहाई के बाद कोली ने अलग-अलग जगहों पर काम तलाशने की कोशिश की। वह दिल्ली, चंडीगढ़ और चेन्नई तक गया। चेन्नई में कुछ समय गौशाला में भी काम किया। बाद में वह हरिद्वार पहुंचा, जहां परिचितों की मदद से उसे नौकरी और रहने की व्यवस्था मिली।
हरिद्वार में उसने पहले वॉचमैन का काम किया और फिर चाय की दुकान शुरू की। स्थानीय लोगों के अनुसार, दुकान शुरू करने से पहले उसने पूजा कराई और प्रसाद भी बांटा था। शुरुआती दिनों में वह सामान्य तरीके से दुकान चला रहा था।
आत्महत्या की वजह को लेकर अलग-अलग बातें
कोली की मौत के बाद उसके आत्महत्या करने की वजह को लेकर अलग-अलग बातें सामने आई हैं। एक रिपोर्ट में उसके परिचित नारायण सिंह रावत के हवाले से बताया गया कि घटना से पहले कोली ने खोखे के किराये को लेकर परेशानी की बात कही थी और आर्थिक मदद मांगी थी। दूसरी ओर, कुछ रिपोर्टों में दुकान हटने की आशंका और आर्थिक तंगी को संभावित वजह के तौर पर बताया गया है। हालांकि, अभी किसी एक कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इसलिए फिलहाल यह निश्चित रूप से कहना संभव नहीं है कि कोली ने आत्महत्या क्यों की। पुलिस की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही उसकी मौत से जुड़े परिस्थितिजन्य तथ्यों की तस्वीर साफ हो सकेगी।