एटा मेडिकल कॉलेज की साइटोलॉजी लैब में जनवरी 2026 से अब तक 400 से अधिक मरीजों की गांठों की जांच की जा चुकी है। इनमें 50 से अधिक मरीजों में कैंसर की पुष्टि हुई है। जांच के दौरान पुरुषों के स्तन में भी कैंसर के मामले सामने आए हैं।
मेडिकल कॉलेज की लैब में एक दरोगा समेत तीन पुरुषों के स्तन में बनी गांठ की जांच में कैंसर की पुष्टि हुई है। चिकित्सकों के अनुसार पुरुषों में स्तन कैंसर महिलाओं की तुलना में कम पाया जाता है, लेकिन स्तन या छाती में गांठ बनने पर इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
विशेषज्ञों के मुताबिक शरीर में बनने वाली हर गांठ कैंसर नहीं होती। गांठ की जांच के बाद ही उसकी प्रकृति का पता चलता है और जरूरत के अनुसार आगे के उपचार की दिशा तय की जाती है।
गांठ की साइटोलॉजी जांच से होती है पहचान
मेडिकल कॉलेज की साइटोलॉजी लैब में शरीर के अलग-अलग हिस्सों में बनने वाली गांठों की जांच की जाती है। इसके लिए गांठ से कोशिकाओं का नमूना लेकर उसकी जांच की जाती है।
साइटोलॉजी लैब की सीनियर रेजीडेंट डॉ. रेखा जैन के अनुसार शरीर में किसी भी तरह की गांठ को लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पुरुषों के स्तन में गांठ होने पर भी चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।
जनवरी से अब तक हुई जांच में 50 से अधिक मरीजों में कैंसर की पुष्टि हुई है। कैंसर की पुष्टि होने के बाद मरीजों को उनकी स्थिति के अनुसार आगे के उपचार के लिए भेजा जाता है।
पुरुषों में इन लक्षणों पर दें ध्यान
पुरुषों में स्तन या छाती के आसपास कुछ बदलाव दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी हो सकता है। इनमें प्रमुख लक्षण हैं:
- छाती, निप्पल के पीछे या कांख में सख्त गांठ महसूस होना।
- निप्पल का अंदर की ओर मुड़ना या उसके आकार में बदलाव।
- निप्पल से खून या किसी अन्य तरल पदार्थ का निकलना।
- छाती की त्वचा पर गड्ढे, सिकुड़न या लालिमा दिखाई देना।
- निप्पल या उसके आसपास लगातार घाव या पपड़ी बनी रहना।
समय पर जांच कराने से गांठ की प्रकृति का पता लगाने में मदद मिल सकती है। किसी भी गांठ को देखकर खुद से कैंसर मानना उचित नहीं है, क्योंकि हर गांठ कैंसर नहीं होती।